Sunday, 5 March 2017

स्वागत में आज कल

स्वागत में आज कल के चढ़ रही सीढ़ियाँ,
आन बान शान बन खड़ी नयी पीढ़ियाँ।
ये लड़ लड़ थक जाती हार नहीं मानती,
हौसला लिये जिगर खड़ी नयी पीढ़ियाँ।
ठण्डी गर्मी बरसात थक जाते हारकर,
मौसमों को मात देती खड़ी नयी पीढ़ियाँ।
मंजिलें हैं दूर अभी अंधेरा जो बढ़ रहा,
पुण्ज लिये हाथ साथ खड़ी नयी पीढ़ियाँ।।
                             ©अतुल कुमार यादव.

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