दिल का दीपक जलता रहता,
चोट जिगर की सहता रहता।
चोट जिगर की सहता रहता।
गीत तराना दिल को भाता,
मुझसे हर पल कहता रहता।
मुझसे हर पल कहता रहता।
दिल में है जो गम का सागर,
आँसू बन कर बहता रहता।
आँसू बन कर बहता रहता।
नफरत चाहत दिल का हिस्सा,
हसरत बन कर चलता रहता।
हसरत बन कर चलता रहता।
नजरों में अब नजरें छिपती,
सूरज भी तो ढलता रहता।
सूरज भी तो ढलता रहता।
अपने दिल के हिस्सें में तो,
बस सपना ही पलता रहता।
बस सपना ही पलता रहता।
वो क्या जानें पीर पराई,
धुन अपनी जो रमता रहता।
धुन अपनी जो रमता रहता।
पल कहता है सब सहता है
सब चलता है चलता रहता।।
सब चलता है चलता रहता।।
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