इंसानियत के
आसमाँ तले
चलो
नादानियों का
एक चिराग जलाते हैं
और उसकी रौशनी में
उम्मीदों का एक पतंग
उड़ाते हैं
भेज देते हैं उसे
बुलंदियों के
उस शिखर पर
जहाँ परिन्दों की उड़ान
खत्म होकर
मुस्कान बिखेरती है
थोड़ा मुश्किल है...
थोड़ा मुश्किल है
पर असम्भव नहीं।
आज इस जमीं से
प्रेम के जज्बात
और
जिन्दगी की मायने
दोनों ही जुदा हैं
पतंग में लगी
अहसासों की डोर से
कामयाबी की महक
हकीकत, किस्मत,
खुशहाली व रौनक
सब गायब है।
आज पसरे इस सन्नाटे में
लगभग हर चेहरे से
चेहरे की रूहानी खुश्बू
तरसते वजूद
अनमने ख्वाब
नये अरमान
दूर खड़े नजर आते हैं,
दौर मुश्किल जरूर है
फिर भी
राग, द्वेष, लोभ, क्षोम, मोह
सब भूलकर
एहसासों के पन्नों पर
अल्फाजों के जो
अनगढ़ मोती
पिरोये गये हैं
उनके सुख में
सिमटकर
उनकी खुशियों से
लिपटकर
तुम, उनका
आज आलिंगन कर लो
यकीनन
तुम्हारी जिन्दगी का
गुलिस्तां
फिर से खिल उठेगा।।
©अतुल कुमार यादव.
आसमाँ तले
चलो
नादानियों का
एक चिराग जलाते हैं
और उसकी रौशनी में
उम्मीदों का एक पतंग
उड़ाते हैं
भेज देते हैं उसे
बुलंदियों के
उस शिखर पर
जहाँ परिन्दों की उड़ान
खत्म होकर
मुस्कान बिखेरती है
थोड़ा मुश्किल है...
थोड़ा मुश्किल है
पर असम्भव नहीं।
आज इस जमीं से
प्रेम के जज्बात
और
जिन्दगी की मायने
दोनों ही जुदा हैं
पतंग में लगी
अहसासों की डोर से
कामयाबी की महक
हकीकत, किस्मत,
खुशहाली व रौनक
सब गायब है।
आज पसरे इस सन्नाटे में
लगभग हर चेहरे से
चेहरे की रूहानी खुश्बू
तरसते वजूद
अनमने ख्वाब
नये अरमान
दूर खड़े नजर आते हैं,
दौर मुश्किल जरूर है
फिर भी
राग, द्वेष, लोभ, क्षोम, मोह
सब भूलकर
एहसासों के पन्नों पर
अल्फाजों के जो
अनगढ़ मोती
पिरोये गये हैं
उनके सुख में
सिमटकर
उनकी खुशियों से
लिपटकर
तुम, उनका
आज आलिंगन कर लो
यकीनन
तुम्हारी जिन्दगी का
गुलिस्तां
फिर से खिल उठेगा।।
©अतुल कुमार यादव.
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