Monday, 6 March 2017

कब ले होई

हे भगवान!
तू सब क मालिक,
बस रात खतम होखे के बा,
फिर नया सबेरा होखे के बा,
नया उजाला फिर से होई,
हमार जिनगी भरल बा तम से,
अब बता द,
ईहा उजाला कब ले होई?
हे भगवान!
तू सब क मालिक,
तहरे कृपा त जग पर बा,
तहरे दया के सागर मे,
सब कर नाव त तैरत बा,
हमरे नाव क न पता ठिकाना,
अब बता द,
दरिया पार हमसे कब ले होई?
हे भगवान!
तू सब क मालिक,
हमार विश्वास बस तोह पर बा,
विश्वास कबो न कम होखे,
एहकर फैसला त बस तोह पर बा,
सगरो चेहरा हमके हँसत मिलल,
अब बता द,
ये चेहरा पर मुस्कान कब ले होई॥
हे भगवान!
तू सब क मालिक,
आज सगरो सवाल बस तोहसे बा,
जननी जग के बा आधार,
फिर तोहसे जुड़ल तार इ कईसे बा,
कण-कण में नाम तहरे व्यापित,
फिर बता द,
हमार उद्धार यहाँ से कब ले होई?
                      ©अतुल कुमार यादव.

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