किताबों का विमोचन हो गया है,
जग मतलबी यकीनन हो गया है|
जग मतलबी यकीनन हो गया है|
मुकद्दर पर जरा था फक्र मुझको,
तिमिर सा आज बचपन हो गया है|
तिमिर सा आज बचपन हो गया है|
मुहब्बत सी हकीकत गर लिखूँ तो,
सलामत आज आंगन हो गया है|
सलामत आज आंगन हो गया है|
छिपाना था जिसे दिल में हमेशा,
जताने का अब चलन हो गया है|
जताने का अब चलन हो गया है|
मिले या ना मिले मुझसे कभी जो,
*मेरे सीने की धड़कन हो गया है|*
*मेरे सीने की धड़कन हो गया है|*
खुशी के मोतियों को वो पिरोकर,
मुहब्बत का विज्ञापन हो गया है|
मुहब्बत का विज्ञापन हो गया है|
निभाता है हमेशा साथ मेरा,
कहे कैसे बदचलन हो गया है|
कहे कैसे बदचलन हो गया है|
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