कभी कभी अल्फाजों में,
मैं दर्द महसूसता हूँ।
कभी कभी दर्दों में ही,
अल्फाज महसूसता हूँ।
मैं दर्द महसूसता हूँ।
कभी कभी दर्दों में ही,
अल्फाज महसूसता हूँ।
ख्वाहिशों के सभी पन्ने,
थक जाते जब बातें कर,
थम जाती सॉसें मेरी,
कुछ अल्फाजों को पाकर।
थक जाते जब बातें कर,
थम जाती सॉसें मेरी,
कुछ अल्फाजों को पाकर।
कुछ अन्जानें छूट गये,
कुछ पहचाने रूठ गये,
कुछ अपने हैं साथ चले,
कुछ अपने भी टूट गये।
कुछ पहचाने रूठ गये,
कुछ अपने हैं साथ चले,
कुछ अपने भी टूट गये।
मंजिल तो बस मंजिल है,
शायद खाबों की नगरी,
जज्बातों के साथ चलो,
कहती भावों की गगरी।
शायद खाबों की नगरी,
जज्बातों के साथ चलो,
कहती भावों की गगरी।
कुतर रहे भाव हमारे,
आँखों के सपने हरदम,
आँसू पीड़ा लाचारी,
भरते अब मुझमें दमखम।
आँखों के सपने हरदम,
आँसू पीड़ा लाचारी,
भरते अब मुझमें दमखम।
सुकूं नहीं मिलता मुझको,
दर्द की भावना पाकर,
लफ्ज बयां होते जाते,
आँखों में अश्क भर भरकर।
दर्द की भावना पाकर,
लफ्ज बयां होते जाते,
आँखों में अश्क भर भरकर।
लोगों का ताना बाना,
ख्यालों का आना जाना,
फिर भी सबका हाथ साथ,
रखकर है साथ निभाना।
ख्यालों का आना जाना,
फिर भी सबका हाथ साथ,
रखकर है साथ निभाना।
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