चहक रहे पर उनके,
बहक रहे मन जिनके,
सुख दुख हैं पल भर के,
सबक सिखा छल कर के।
बहक रहे मन जिनके,
सुख दुख हैं पल भर के,
सबक सिखा छल कर के।
नव बहुतायत उड़ते,
बचपन सा सब जुड़ते,
पर सच को सच कहना,
अलग कभी मत रहना।
बचपन सा सब जुड़ते,
पर सच को सच कहना,
अलग कभी मत रहना।
मिलकर आज डगर में,
खुलकर बोल शहर में,
अगन लगी जब लगने,
लगन लगी तब जगने।
खुलकर बोल शहर में,
अगन लगी जब लगने,
लगन लगी तब जगने।
तन मन भाव बरसते,
पलक किवाड़ अलसते,
कमर झुकाकर चलते,
पल पल हैं सब छलते।
पलक किवाड़ अलसते,
कमर झुकाकर चलते,
पल पल हैं सब छलते।
सब कुछ पाकर जग में,
बिखर गया सब मग में,
गलत कभी मत करना,
'अतुल' कभी मत डरना।
बिखर गया सब मग में,
गलत कभी मत करना,
'अतुल' कभी मत डरना।
सब जड़ चेतन वृति है,
सब परिवर्तन कृति है,
सहज सरोवर दिखती,
कलम समन्दर लिखती।।
©अतुल कुमार यादव.
सब परिवर्तन कृति है,
सहज सरोवर दिखती,
कलम समन्दर लिखती।।
©अतुल कुमार यादव.
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