रिश्तों की तस्तरी में
अधूरे ख्वाब
न जाने कब तक
बोझ बन कर
यूँ ही पलते रहेंगे।
न जाने कब तक
हमको आपको
अपनी मजबूरियाँ
गिनाते रहेंगें,
साथ ही साथ
आजमाते रहेंगे।
न जाने कब तक...,
न जाने कब तक
आपके हमारे आँसू
बेवजह गिरते रहेंगे
और लोग गिराते रहेंगे।
ये संसार है
नफरतों का
जहां किसी की खुशी
किसी से देखी नहीं जाती।
इस कौम के लोग
न जाने कब तक
हमें आँखें
दिखाते रहेंगे
दिन-ब-दिन
चिढ़ते रहेंगे
और
पता नहीं कब तक
मुँह बनाकर
चिढ़ाते रहेंगे
और हम
एक-दूसरे पर ही
न जाने कब, इसका
इल्जाम लगाते रहेंगे।
चलो
इन रिश्तों के
दहलीज पर
खड़े होकर
अपने हसरतों से
बुलंदियों से
अश्कों की
वो सारी बेड़ियाँ
तोड़ देते हैं
जो नफरतों का
आसामान
हमारे दामन में
डाले हुए हैं।
मैं आपसे
कोई वादा तो नहीं कर सकता
कोई उम्मीद भी नहीं रख सकता
फिर भी एक विचार
अपने जेहन में लिए हुए हूँ, कि
आप से जब भी मिलूँ
हँसता हँसाता रहूँ।
अब आप इसे
वादा,इरादा, विश्वास, प्रेम
या फिर अपने प्रति श्रद्धा
समझ सकते है।
जो नाम देना चाहे
दे सकते हैं,
छोड़ता हूँ आप पर
कोई इनमें से एक
वादा समझकर
चुन लीजिएगा।
©अतुल कुमार यादव.
अधूरे ख्वाब
न जाने कब तक
बोझ बन कर
यूँ ही पलते रहेंगे।
न जाने कब तक
हमको आपको
अपनी मजबूरियाँ
गिनाते रहेंगें,
साथ ही साथ
आजमाते रहेंगे।
न जाने कब तक...,
न जाने कब तक
आपके हमारे आँसू
बेवजह गिरते रहेंगे
और लोग गिराते रहेंगे।
ये संसार है
नफरतों का
जहां किसी की खुशी
किसी से देखी नहीं जाती।
इस कौम के लोग
न जाने कब तक
हमें आँखें
दिखाते रहेंगे
दिन-ब-दिन
चिढ़ते रहेंगे
और
पता नहीं कब तक
मुँह बनाकर
चिढ़ाते रहेंगे
और हम
एक-दूसरे पर ही
न जाने कब, इसका
इल्जाम लगाते रहेंगे।
चलो
इन रिश्तों के
दहलीज पर
खड़े होकर
अपने हसरतों से
बुलंदियों से
अश्कों की
वो सारी बेड़ियाँ
तोड़ देते हैं
जो नफरतों का
आसामान
हमारे दामन में
डाले हुए हैं।
मैं आपसे
कोई वादा तो नहीं कर सकता
कोई उम्मीद भी नहीं रख सकता
फिर भी एक विचार
अपने जेहन में लिए हुए हूँ, कि
आप से जब भी मिलूँ
हँसता हँसाता रहूँ।
अब आप इसे
वादा,इरादा, विश्वास, प्रेम
या फिर अपने प्रति श्रद्धा
समझ सकते है।
जो नाम देना चाहे
दे सकते हैं,
छोड़ता हूँ आप पर
कोई इनमें से एक
वादा समझकर
चुन लीजिएगा।
©अतुल कुमार यादव.
No comments:
Post a Comment