ते'रे ही ख़ाब की दुनिया ते'री जन्नत रही होगी,
मिले सुख शान्ति औ सब कुछ यही चाहत रही होगी।
मिले सुख शान्ति औ सब कुछ यही चाहत रही होगी।
उन्हीं से पूछ लेना तुम उन्हीं के प्यार के किस्से,
जले हैं आग में जो भी कहीं नफरत रही होगी।
जले हैं आग में जो भी कहीं नफरत रही होगी।
भले हो वक्त वो जालिम शिकायत तुम नहीं करना
तुम्हारे ही इबादत की कहीं इल्लत रही होगी।
तुम्हारे ही इबादत की कहीं इल्लत रही होगी।
अदायें मुस्कुराने की यकीनन भूल जायेंगे,
जिन्हें सपनें दिखाने की सदा आदत रही होगी।
जिन्हें सपनें दिखाने की सदा आदत रही होगी।
"अतुल" अंदाज हैं उनके नजर अंदाज करते हैं,
नहीं उनसे मिलों जी तुम यहीं मन्नत रही होगी।
©अतुल कुमार यादव.
नहीं उनसे मिलों जी तुम यहीं मन्नत रही होगी।
©अतुल कुमार यादव.
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