जो ख्वाब था बिखर गया,
कुछ इधर कुछ उधर गया।
कुछ इधर कुछ उधर गया।
सुकूं का कुछ पता नहीं,
सुख किधर दुख किधर गया।
सुख किधर दुख किधर गया।
श्याह रात औ बात में,
एक रास्ता गुजर गया।
एक रास्ता गुजर गया।
अजीब सी है जिन्दगी,
लहू दिल में उतर गया।
लहू दिल में उतर गया।
चाँद दिप्त है गली में,
सुना, और बाहर गया।
सुना, और बाहर गया।
पलक अभी झपकी नहीं,
फिर चाँद कब उतर गया।
फिर चाँद कब उतर गया।
भटका डगर डगर सही,
पर अन्तत: सिहर गया।
पर अन्तत: सिहर गया।
साथ में चला ही नहीं
मैं आज तो मुकर गया।
मैं आज तो मुकर गया।
आँखों में सपनें लिए,
बीत आठों पहर गया।
बीत आठों पहर गया।
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