हम तो उनकी नजरों पर नजर रखते हैं,
घर के गमलों में हम भी शज़र रखते हैं।
घर के गमलों में हम भी शज़र रखते हैं।
हमको क्या समझेंगे जो झुठ बोलते हैं।
हम तो सच कहने का बस हुनर रखते हैं।
हम तो सच कहने का बस हुनर रखते हैं।
उनको तो शायद ही कुछ हो ज्ञात मेरा,
पर हम हैं की उनकी हर खबर रखते हैं।
पर हम हैं की उनकी हर खबर रखते हैं।
वो महफिल में बैठें शायद गमजदा हो,
पर हम तो बातों में ही अपना असर रखते हैं।
पर हम तो बातों में ही अपना असर रखते हैं।
वो रखते होगें अपने जेहन में तमाशें,
पर हम दिल के शहरों में शहर रखते हैं।।
पर हम दिल के शहरों में शहर रखते हैं।।
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