इम्तिहान
सबेरे सबेरे के बेला में आज ना जाने काहे नीलमवाँ के आँख तनिक जल्दी से खुल गईल, रोज त उ सात बजे जागत रहे लेकिन आज चारे बजे जाग गईल। उ फेरो सुतल चाहत रहे लेकिन नींद ना अईला से ना सुतल। बिस्तरा से उठ के सीधे बाबू जी के कमरा के गईल जाके देखल त बाबू जी सूतल रहलन लेकिन नींद में ना रहलन, काहे से कि उनकरों आँख अभी खुलल रहल। नीलमवा देख के ई सब थोड़ी सोच मे पड़ गईल। फिर बिना कुछ विचार के आवाज लगा दिहल – “बाबू जी, अभी आप जागल बाड़ी, आपके नींद ना आवत बा का?” ना बेटा अईसन कुछ ना बा, बस अभिये नींद खुल गईल ह लेकिन आज बेटा तू एतना जल्दी कईसे उठ गईला ह- बाबू जी भी नीलमवाँ से जवाब आ सवाल कर दिहलन।
नीलमवा बाबू जी के सवाल के जवाब तुरन्त दे देहलस – “बाबू जी! अब हमार परीक्षा आवे वाला बा जेवना से नींद ना आवत बा” एतने बोलत बोलत नीलमवा बाबू जी के कमरा में भजन के कैसेट चला दिहल “रघुपति राघव राजा राम, कबीर अमृत बानी… क्रम से शुरु हो गईल, नीलमवा फिर अपने कमरा में जाके अपन बिखरल किताब समेट के रख दिहल फिर जाके रसोई में चाय बनावे लागल। चाय बनला के बाद घर में जे जे जागल रहल सबका खाट तक पहुँचा दिहलस। ईधर फिर जब बाबू जी के कमरा में चाय ले के पहुँचल त देखल कि अभी भी बाबू जी खाट पर लेटल आँख खोल के कुछ सोचला में लागल हवन..। ए बेर देख के नीलमवा के मन अधीर हो गईल। चाय बाबू जी पकड़ा के अपना कमरा में दौड़ के भाग आईल..।आके तुरन्त दिवार पर टगल अपने मरल माई के फोटो उतार के सीना से लगा के सिसके लागल।
आज नीलमवा बार बार सोचत रहल, काश माई आज तू रहतू त आज एह टाईम बाबू जी के आँख अईसे ना खुलल रहत। पता ना कब फिर रोवत रोवत निलमवाँ सुत गईल..। जागल त सूरज देवता कपार पर नजर आवत रहलन, बाबू जी अपना काम पर जा चुकल रहलन, भैया भी अपना काँलेज के निकल गईल रहलन। घर के बाकी सदस्य भी अपना अपना काम में मसगूल रहले। इम्तिहान आवे वाला रहल एह से इम्तिहान के तैयारी के वास्ते नीलमवा के स्कूल बन्द रहल। थोड़ी देर बाद जब फिर नीलमवा अपने कमरा में पहुँचल त माई के फोटो बिस्तरा पर देख के फिर से अधीर हो गईल… बहूत देर ले माई के याद में गुम रहल… रह रह के पहिले के हर बात माई के याद आवत रहल, पर का करो अब वो याद के, बस याद ही त आ सकत रहे माई त ना न। मन मार के मायूस पूरे दिन रहल कबो कबो आँख से आँसू भी चेहरा पर आवत जात दिखाइ देहलस।
इधर बाबू जी आज नीलमवा के भविष्य के लेके बहूत परेशान रहलन। कहल जाला कि मेड़ के टूटल, हवा के रूठल, पहाड़ के जलल, नदी के चलल, मोर के नाचल, शेर के दहाड़ल, महुआ के गिरल, बादल के बरसल, सरसो क हरसल अऊर बागीन के चहकला क एगो सही समय होला। आज कुछ एईसने चिन्ता बाबू जी के नीलमवा के हो गईल। नीलमवा अपने जिला के दसवीं के टाँपर लड़की रहल। जेहता पढ़ला में अऊवल ओतना संस्कार में भी। आज बारहवीं के पेपर ओकरा कपार पर रहल, ओकरा के अपना भविष्य के तनको चिन्ता ना रहल जेतना बाबूँ जी के रहल। बाबू जी अब ओकर शादी कर देहल चाहत रहलन जबकि नीलमवाँ के आँख मे आगे पढ़ला अऊर बढ़ला के ढेर सपना पलत रहल।
बाबू जी एक दिन घर में सबका के पास बुला के नीलमवा के शादी के खबर देहलन। नीलमवा चाह के भी बाबू जी के ओह फैसला के बदलवा न पऊलस। इधर उ पेपर के तैयारी में लागल त दूसरी तरफ घर वाला लोग ओकरा के शादी के तैयारी में। फिलहाल परीक्षा के समय आ गईल, मात्र एक दिन शेष बाचल रहल, तब नीम के पेड़ के नीचे गाँव के पढ़े वाला युवा लोगन के खाट सज गईल, बिछौना लग गईल, नीम के पेड़ के नीचे एह लिये कि केहूँ आज के रात सूत्ती ना, अगर सुत्ती महुये जस टपकत निबकौड़ी जगावत रही । कुछ लोग ना आईल रहले नीम के पेड़ के नीचे, उन्हनी लोगन के लाल्टेन अऊर ढिबरी घर में जलत पुरी रात दिखत रहे। इधर नीलमवाँ आज छत पर बिस्तरा डाल के चाँदनी रात में चाँद में माई के चेहरा आ अऊर तरईयन में माई के दुआ देखत रहल। कबो कबो बड़बड़ात भी रहे कि माई इ जेतना तरई लौकत हवे ना ओतने नम्बर आई। धीरे धीरे क के सारा पेपर खत्म हो गईल। अब बस परिणाम के सबका इंतजार रहल।
घर में सब अपना अपना काम में लागल रहे। २५ जुन के शादी के तारीख पक्का हो गईल। लईका पी०सी०एस० में हेड कांस्टेबल। खबर दे दीहल गईल बिना केहूँ से मर्जी पुछले। २५ जून के परीक्षा-परिणाम के तारिख घोषित कर दिहल गईल। अब नीलमवा परीक्षा परिणाम और शादी के शहनाई के शोर सोच सोच के कबो कबो बेकला के खड़ा हो जात रहे त कबो कबो सिर से पाव ले झटक देत रहल। ओकरा अन्दर आज कल बहूत कुछ टूट-फूट मचल रहल पर केहु से कह ना सकत रहे। सरसो के पियरी नाई ओकरा चेहरा पियरा गईल रहे। एतना ज्यादा तनाव महसूस करत रहल कि दिन दुपहरिया में ही खामोशी के चादर तान के दलान के खाट पर सुत जात रहल।
धीरे धीरे आज २५ जून आ गईल। सबेरे अखबार कहर ढावत नीलमवा के दरवाजे आ गईल, लेकिन शादी के आगे केहूँ अखबार ना देख पऊलस। चारो ओर ढोल नगाड़ा के आवाज सुनात रहे बस नीलमवा के गाँव छोड़ के। तबले अखबार के टुकड़ा लिहले गौरव भैया आ पहुँचलन, नीलमवाँ के गाँव के पहिला और आखिरी आई ई ऎस। अरे चचा प्रणाम, हमार छोटकी बहिन नीलमवा कहा बे…। गौरव भैया नीलमवा के बहुत करीब रहलन.. जब कवनो भी दिक्कत होखे नीलमवा के साथ खड़ा रहन। बारहवीं के पुरा गणित लगभग लगभग उहे त सिखईले रहलन। अभी चचा कुछ बोलही के रहलन की गौरव बाबू चचा के पकड़ के नीलमवा के सामने छोटकी छोटकी के आवाज लगावत पहुँच गईले। नीलमवाँ गौरव के देखते बोलल अरे भैया आप.. कब अईलीं घरे नौकरी से…। गौरव बाबू – “अरे चुप, ई सब बाद में, ले हई पेपर देख और बोल तोके आज का चाही आज देबे के तैयार बानी। एतने में बाबू जी ओर मुह घुमा के “चचा आज फिर से निलमवा टाँप क गईल हो गाँव जवार”। एतना सुनते बाबू जी के आँख में आँसू आ गईल। त दुसरी ओर निलमवा गौरव के पकड़ के भैया भैया के साथे आज पहिली बार माई माई कह के बाबू के सामने रोवे लागल। आज नीलमवा एगो अऊर परीक्षा जीवन के पास क लिहलस।
लेकिन दूसरी ओर दुर्भाग्य रहल की एकहू लईका पास न भईलनस ओ गाँव के। पुरा गाँव आज गाली देत रहल लईका समुदाय के, त केहु “इ ससूरा कुल पढ़त लिखत ना हवन स खाली हमनी के पढ़ावत हवन स” कहने से थक नही रहा। शाम होत होत माहोल गाँव के बदल गईल, पुरा गाँव नीलमवाँ की शादी में आवे खातिर तैयार दिखत रहल, खुशी भी आज त दुगुनी जे हो गईल रहे। उतावलापन अऊर खुशी एतना ज्यादा बढ़ गईल रहे कि लईका कुल अपना में कहे स “अऊर हो रजा! चला आज दू दू गो खुशी के लड्डू खा आवल जा।
नीलम के घर के माहौल त शाम के समय गजब हो गईल, जब बारात दुआर पर पहुँचल। केहू चना के दाल, केहू अरहर के दाल, केहू रोटी केहू पुड़ी केहू चावल केहू सब्जी केहू सलाद केहू पानी त केहू कुछ लिहले दौड़त बारातियन के पंक्ति में नजर आईल। आखिर ओह दिन नीलमवा के ना चाहते हुये भी शादी कर दिहल गईल। नीलम के सपना के उड़ान ओ दिन बन्द हो गईल जेवना दिन नीलम के पति निहाल बाबू पढा़ई खातिर मना कर दिहले। शादी के तीन साल तीन महिना बाद नीलम के हँसी खुशी जिनगी में भूचाल आ गईल। भूचाल एह लिये कि निहाल बाबू के नौकरी से तबादला के पेपर सरकार से मिल गईल अऊर नौकरी के एह बदलाव में निहाल बाबू के दुर्घटना हो गईल अऊर जवन ना होखे के तवने हो गईल। चाह के भी निहाल बाबू बच ना पवले। कुछ दिन त नीलमवा के हाल ठीक ठाक रहल लेकिन कुछ दिन बाद ज्यादा खराब होखे लागल त ससुराल वाले मायके लाकर पहुँचा गये। एकहू बच्चा न रहला से नीलम के दूसरी शादी के आजादी दे दीहलें ससूराल वाले पर नीलमवा के दुसरा के नाम के सिन्दूर माँग में भरल अच्छा ना लागल।
नीलम के जिनगी वैसे त हमेशा माई के साया के बिन दुख मे ही बीतत रहल पर वापस मायके में छोड़ला के दुख, निहाल बाबू के याद दिन-ब-दिन खाये लागल। सरकार इधर पेपर निहाल बाबू के घर भेज देहलस नीलम के नौकरी के। नीलम के ससूराल वाले फिर मायके से उठा ले गये ससुराल। साहब लालच बहुत कुछ करा देला। ससुराल पहुच के जब नीलम पेपर देखलस त अपना ससूर जी से बोलल- “बाबू जी ई हे नोकरिया हमार सुख चैन आ राउर बेटा छिन लेहलस फेर काहे हमका ओही में भेजत हईं, हम नौकरी ना कयल चाहत तानी, नौकरी नहिये करें खातिर उहाँ के त हमार पढ़ाई छुड़वा दिहनी न” बात सुनकर ससूर जी के आँख में आँसू आ गईल। आँसू पोछत ससुर जी घर से बहरा निकल गईलीं। फिर कबों नौकरी के नीलम के ना कहले।
पर, घर के अऊर सदस्य के कहला पर नीलम नौकरी ज्वाईन कर लेहलस। एक दिन सबेरे सबेरे बहूत खुश होके नौकरी पर निकलल, पता ना काहे बहुत खुश रहल शायद निहाल के लागत रहल फेरो सपना में देखले रहल, सबेरे सबेरे ससुर के पाव छुवलस सास के पाव छुवलस, खुशी खुशी घर के बहरा पाव रखलस, धीरे धीरे वो दिन मुस्कुरात भी रहल तब सास ई सब देख के बोल दिहली- “नीलम बेटा! आज तू मुस्कुरात घरी बहूत अच्छा लागत हऊ” तबहीये नीलम बोल दिहलस - “का माँ आपे न कहेली की घर से केहूँ बहरा निकले त टोके के ना चाही, अब बताई आज निहाल बाबू मिले के बोलईली ह अऊर आप टोक लगा दिहली”। निहाल के माँई के आँख भर गईल अऊर हाथ दुआ के ऊपर उठ गईल नीलमवा के ओर, दिल से आवाज निकलल- “नीलम बेटा! काश आज तोहसे मिले खातिर हमार बेटा जिन्दा रहत”। एतने बोलते बोलते माई बेशुध होके उहवे गिर गईली। एने नीलमवा कार्यालय पहुँच के कुर्सी पर बैईठल निहाल बाबू अऊर माँ के यादों में खो गईल। अचानक ओकरा दिल के धड़कने बढ़ गईल, जब तक केहूँ कुछ करत या कहीं ले जा पावत तब तक नीलम जमीं पर सुत गईल। चल गईल निहाल बाबू अऊर अपने माई से मिले। छोड़ देहलस ई धरती ई जहान हमेशा हमेशा खातिर। हमेशा टाँप करे वाली नीलमवाँ आज तक ले जिनगी के पढ़ाई मन से पढ़ले रहल, कबो फेल ना भईल रहे, लेकिन जिनगी के परीक्षा में आज इम्तेहान शुरू भईला से पहिले ही फेल हो गईल।
©अतुल कुमार यादव.
नीलमवा बाबू जी के सवाल के जवाब तुरन्त दे देहलस – “बाबू जी! अब हमार परीक्षा आवे वाला बा जेवना से नींद ना आवत बा” एतने बोलत बोलत नीलमवा बाबू जी के कमरा में भजन के कैसेट चला दिहल “रघुपति राघव राजा राम, कबीर अमृत बानी… क्रम से शुरु हो गईल, नीलमवा फिर अपने कमरा में जाके अपन बिखरल किताब समेट के रख दिहल फिर जाके रसोई में चाय बनावे लागल। चाय बनला के बाद घर में जे जे जागल रहल सबका खाट तक पहुँचा दिहलस। ईधर फिर जब बाबू जी के कमरा में चाय ले के पहुँचल त देखल कि अभी भी बाबू जी खाट पर लेटल आँख खोल के कुछ सोचला में लागल हवन..। ए बेर देख के नीलमवा के मन अधीर हो गईल। चाय बाबू जी पकड़ा के अपना कमरा में दौड़ के भाग आईल..।आके तुरन्त दिवार पर टगल अपने मरल माई के फोटो उतार के सीना से लगा के सिसके लागल।
आज नीलमवा बार बार सोचत रहल, काश माई आज तू रहतू त आज एह टाईम बाबू जी के आँख अईसे ना खुलल रहत। पता ना कब फिर रोवत रोवत निलमवाँ सुत गईल..। जागल त सूरज देवता कपार पर नजर आवत रहलन, बाबू जी अपना काम पर जा चुकल रहलन, भैया भी अपना काँलेज के निकल गईल रहलन। घर के बाकी सदस्य भी अपना अपना काम में मसगूल रहले। इम्तिहान आवे वाला रहल एह से इम्तिहान के तैयारी के वास्ते नीलमवा के स्कूल बन्द रहल। थोड़ी देर बाद जब फिर नीलमवा अपने कमरा में पहुँचल त माई के फोटो बिस्तरा पर देख के फिर से अधीर हो गईल… बहूत देर ले माई के याद में गुम रहल… रह रह के पहिले के हर बात माई के याद आवत रहल, पर का करो अब वो याद के, बस याद ही त आ सकत रहे माई त ना न। मन मार के मायूस पूरे दिन रहल कबो कबो आँख से आँसू भी चेहरा पर आवत जात दिखाइ देहलस।
इधर बाबू जी आज नीलमवा के भविष्य के लेके बहूत परेशान रहलन। कहल जाला कि मेड़ के टूटल, हवा के रूठल, पहाड़ के जलल, नदी के चलल, मोर के नाचल, शेर के दहाड़ल, महुआ के गिरल, बादल के बरसल, सरसो क हरसल अऊर बागीन के चहकला क एगो सही समय होला। आज कुछ एईसने चिन्ता बाबू जी के नीलमवा के हो गईल। नीलमवा अपने जिला के दसवीं के टाँपर लड़की रहल। जेहता पढ़ला में अऊवल ओतना संस्कार में भी। आज बारहवीं के पेपर ओकरा कपार पर रहल, ओकरा के अपना भविष्य के तनको चिन्ता ना रहल जेतना बाबूँ जी के रहल। बाबू जी अब ओकर शादी कर देहल चाहत रहलन जबकि नीलमवाँ के आँख मे आगे पढ़ला अऊर बढ़ला के ढेर सपना पलत रहल।
बाबू जी एक दिन घर में सबका के पास बुला के नीलमवा के शादी के खबर देहलन। नीलमवा चाह के भी बाबू जी के ओह फैसला के बदलवा न पऊलस। इधर उ पेपर के तैयारी में लागल त दूसरी तरफ घर वाला लोग ओकरा के शादी के तैयारी में। फिलहाल परीक्षा के समय आ गईल, मात्र एक दिन शेष बाचल रहल, तब नीम के पेड़ के नीचे गाँव के पढ़े वाला युवा लोगन के खाट सज गईल, बिछौना लग गईल, नीम के पेड़ के नीचे एह लिये कि केहूँ आज के रात सूत्ती ना, अगर सुत्ती महुये जस टपकत निबकौड़ी जगावत रही । कुछ लोग ना आईल रहले नीम के पेड़ के नीचे, उन्हनी लोगन के लाल्टेन अऊर ढिबरी घर में जलत पुरी रात दिखत रहे। इधर नीलमवाँ आज छत पर बिस्तरा डाल के चाँदनी रात में चाँद में माई के चेहरा आ अऊर तरईयन में माई के दुआ देखत रहल। कबो कबो बड़बड़ात भी रहे कि माई इ जेतना तरई लौकत हवे ना ओतने नम्बर आई। धीरे धीरे क के सारा पेपर खत्म हो गईल। अब बस परिणाम के सबका इंतजार रहल।
घर में सब अपना अपना काम में लागल रहे। २५ जुन के शादी के तारीख पक्का हो गईल। लईका पी०सी०एस० में हेड कांस्टेबल। खबर दे दीहल गईल बिना केहूँ से मर्जी पुछले। २५ जून के परीक्षा-परिणाम के तारिख घोषित कर दिहल गईल। अब नीलमवा परीक्षा परिणाम और शादी के शहनाई के शोर सोच सोच के कबो कबो बेकला के खड़ा हो जात रहे त कबो कबो सिर से पाव ले झटक देत रहल। ओकरा अन्दर आज कल बहूत कुछ टूट-फूट मचल रहल पर केहु से कह ना सकत रहे। सरसो के पियरी नाई ओकरा चेहरा पियरा गईल रहे। एतना ज्यादा तनाव महसूस करत रहल कि दिन दुपहरिया में ही खामोशी के चादर तान के दलान के खाट पर सुत जात रहल।
धीरे धीरे आज २५ जून आ गईल। सबेरे अखबार कहर ढावत नीलमवा के दरवाजे आ गईल, लेकिन शादी के आगे केहूँ अखबार ना देख पऊलस। चारो ओर ढोल नगाड़ा के आवाज सुनात रहे बस नीलमवा के गाँव छोड़ के। तबले अखबार के टुकड़ा लिहले गौरव भैया आ पहुँचलन, नीलमवाँ के गाँव के पहिला और आखिरी आई ई ऎस। अरे चचा प्रणाम, हमार छोटकी बहिन नीलमवा कहा बे…। गौरव भैया नीलमवा के बहुत करीब रहलन.. जब कवनो भी दिक्कत होखे नीलमवा के साथ खड़ा रहन। बारहवीं के पुरा गणित लगभग लगभग उहे त सिखईले रहलन। अभी चचा कुछ बोलही के रहलन की गौरव बाबू चचा के पकड़ के नीलमवा के सामने छोटकी छोटकी के आवाज लगावत पहुँच गईले। नीलमवाँ गौरव के देखते बोलल अरे भैया आप.. कब अईलीं घरे नौकरी से…। गौरव बाबू – “अरे चुप, ई सब बाद में, ले हई पेपर देख और बोल तोके आज का चाही आज देबे के तैयार बानी। एतने में बाबू जी ओर मुह घुमा के “चचा आज फिर से निलमवा टाँप क गईल हो गाँव जवार”। एतना सुनते बाबू जी के आँख में आँसू आ गईल। त दुसरी ओर निलमवा गौरव के पकड़ के भैया भैया के साथे आज पहिली बार माई माई कह के बाबू के सामने रोवे लागल। आज नीलमवा एगो अऊर परीक्षा जीवन के पास क लिहलस।
लेकिन दूसरी ओर दुर्भाग्य रहल की एकहू लईका पास न भईलनस ओ गाँव के। पुरा गाँव आज गाली देत रहल लईका समुदाय के, त केहु “इ ससूरा कुल पढ़त लिखत ना हवन स खाली हमनी के पढ़ावत हवन स” कहने से थक नही रहा। शाम होत होत माहोल गाँव के बदल गईल, पुरा गाँव नीलमवाँ की शादी में आवे खातिर तैयार दिखत रहल, खुशी भी आज त दुगुनी जे हो गईल रहे। उतावलापन अऊर खुशी एतना ज्यादा बढ़ गईल रहे कि लईका कुल अपना में कहे स “अऊर हो रजा! चला आज दू दू गो खुशी के लड्डू खा आवल जा।
नीलम के घर के माहौल त शाम के समय गजब हो गईल, जब बारात दुआर पर पहुँचल। केहू चना के दाल, केहू अरहर के दाल, केहू रोटी केहू पुड़ी केहू चावल केहू सब्जी केहू सलाद केहू पानी त केहू कुछ लिहले दौड़त बारातियन के पंक्ति में नजर आईल। आखिर ओह दिन नीलमवा के ना चाहते हुये भी शादी कर दिहल गईल। नीलम के सपना के उड़ान ओ दिन बन्द हो गईल जेवना दिन नीलम के पति निहाल बाबू पढा़ई खातिर मना कर दिहले। शादी के तीन साल तीन महिना बाद नीलम के हँसी खुशी जिनगी में भूचाल आ गईल। भूचाल एह लिये कि निहाल बाबू के नौकरी से तबादला के पेपर सरकार से मिल गईल अऊर नौकरी के एह बदलाव में निहाल बाबू के दुर्घटना हो गईल अऊर जवन ना होखे के तवने हो गईल। चाह के भी निहाल बाबू बच ना पवले। कुछ दिन त नीलमवा के हाल ठीक ठाक रहल लेकिन कुछ दिन बाद ज्यादा खराब होखे लागल त ससुराल वाले मायके लाकर पहुँचा गये। एकहू बच्चा न रहला से नीलम के दूसरी शादी के आजादी दे दीहलें ससूराल वाले पर नीलमवा के दुसरा के नाम के सिन्दूर माँग में भरल अच्छा ना लागल।
नीलम के जिनगी वैसे त हमेशा माई के साया के बिन दुख मे ही बीतत रहल पर वापस मायके में छोड़ला के दुख, निहाल बाबू के याद दिन-ब-दिन खाये लागल। सरकार इधर पेपर निहाल बाबू के घर भेज देहलस नीलम के नौकरी के। नीलम के ससूराल वाले फिर मायके से उठा ले गये ससुराल। साहब लालच बहुत कुछ करा देला। ससुराल पहुच के जब नीलम पेपर देखलस त अपना ससूर जी से बोलल- “बाबू जी ई हे नोकरिया हमार सुख चैन आ राउर बेटा छिन लेहलस फेर काहे हमका ओही में भेजत हईं, हम नौकरी ना कयल चाहत तानी, नौकरी नहिये करें खातिर उहाँ के त हमार पढ़ाई छुड़वा दिहनी न” बात सुनकर ससूर जी के आँख में आँसू आ गईल। आँसू पोछत ससुर जी घर से बहरा निकल गईलीं। फिर कबों नौकरी के नीलम के ना कहले।
पर, घर के अऊर सदस्य के कहला पर नीलम नौकरी ज्वाईन कर लेहलस। एक दिन सबेरे सबेरे बहूत खुश होके नौकरी पर निकलल, पता ना काहे बहुत खुश रहल शायद निहाल के लागत रहल फेरो सपना में देखले रहल, सबेरे सबेरे ससुर के पाव छुवलस सास के पाव छुवलस, खुशी खुशी घर के बहरा पाव रखलस, धीरे धीरे वो दिन मुस्कुरात भी रहल तब सास ई सब देख के बोल दिहली- “नीलम बेटा! आज तू मुस्कुरात घरी बहूत अच्छा लागत हऊ” तबहीये नीलम बोल दिहलस - “का माँ आपे न कहेली की घर से केहूँ बहरा निकले त टोके के ना चाही, अब बताई आज निहाल बाबू मिले के बोलईली ह अऊर आप टोक लगा दिहली”। निहाल के माँई के आँख भर गईल अऊर हाथ दुआ के ऊपर उठ गईल नीलमवा के ओर, दिल से आवाज निकलल- “नीलम बेटा! काश आज तोहसे मिले खातिर हमार बेटा जिन्दा रहत”। एतने बोलते बोलते माई बेशुध होके उहवे गिर गईली। एने नीलमवा कार्यालय पहुँच के कुर्सी पर बैईठल निहाल बाबू अऊर माँ के यादों में खो गईल। अचानक ओकरा दिल के धड़कने बढ़ गईल, जब तक केहूँ कुछ करत या कहीं ले जा पावत तब तक नीलम जमीं पर सुत गईल। चल गईल निहाल बाबू अऊर अपने माई से मिले। छोड़ देहलस ई धरती ई जहान हमेशा हमेशा खातिर। हमेशा टाँप करे वाली नीलमवाँ आज तक ले जिनगी के पढ़ाई मन से पढ़ले रहल, कबो फेल ना भईल रहे, लेकिन जिनगी के परीक्षा में आज इम्तेहान शुरू भईला से पहिले ही फेल हो गईल।
©अतुल कुमार यादव.
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