रौशनी है जिन्दगी के रंग में,
जख्म हासिल पर सभी को जंग में|
जख्म हासिल पर सभी को जंग में|
राज अपने खुल न जाये बात में,
इसलिए वे शान्त रहते संग में|
इसलिए वे शान्त रहते संग में|
अब सुनहरी धूप लेकर मैं चलूँ,
चाँदनी हो चाँद के जब अंग में|
चाँदनी हो चाँद के जब अंग में|
मोम जैसे तुम पिघलते रात भर
लौट आओ आज अपने ढंग में|
लौट आओ आज अपने ढंग में|
No comments:
Post a Comment