अब मैं अपनी तन्हाईयों के साथ आजाद रहता हूँ,
जो भी है मेरे दिल में सच वही हर बार कहता हूँ।
जो भी है मेरे दिल में सच वही हर बार कहता हूँ।
आज न काफिला हूँ न कश्ती हूँ न कोई मुकद्दर
बस समय का तिनका हूँ समय के साथ बहता हूँ।
बस समय का तिनका हूँ समय के साथ बहता हूँ।
दोस्ती रिश्ता मुहब्बत तो गीत ग़ज़ल कविता हो गयी
गर्दिशों में यही लाचारी नाकामी बार बार सहता हूँ।
गर्दिशों में यही लाचारी नाकामी बार बार सहता हूँ।
ऐ जिन्दगी! तुझे क्या बताऊँ अब अपना पता
सूबह महफिल तो शाम को मयकदे में रहता हूँ।
सूबह महफिल तो शाम को मयकदे में रहता हूँ।
सिखाया है परिन्दों ने हमें अपनी हद में रहना,
उड़ता जब भी हूँ तो बस अपनी जद में रहता हूँ।।
©अतुल कुमार यादव.
उड़ता जब भी हूँ तो बस अपनी जद में रहता हूँ।।
©अतुल कुमार यादव.
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