सोचता हूँ कुछ अल्फाज लिख दूँ,
मैं जीवन का हर साज लिख दूँ|
मैं जीवन का हर साज लिख दूँ|
मेरे वजूद का एहसास लफ्ज़ बन,
जब सिमट जाता है तेरे नामों में,
भावों की गंगा भावूक हो बहती,
जब कागज़ कश्ती औ किनारों में,
बोलता है सूर अरमानों का जब जब
जज्बातों की ऊची उड़ान भरता है,
तब बहुत खामोश होकर बंदिशों में,
कहो तो अब अपना आज लिख दूँ,
सोचता हूँ कुछ अल्फाज लिख दूँ,
मैं जीवन का हर साज लिख दूँ,
जब सिमट जाता है तेरे नामों में,
भावों की गंगा भावूक हो बहती,
जब कागज़ कश्ती औ किनारों में,
बोलता है सूर अरमानों का जब जब
जज्बातों की ऊची उड़ान भरता है,
तब बहुत खामोश होकर बंदिशों में,
कहो तो अब अपना आज लिख दूँ,
सोचता हूँ कुछ अल्फाज लिख दूँ,
मैं जीवन का हर साज लिख दूँ,
वक्त की बीती सारी बातें भूलकर,
हसरतों के गुच्छों से खुशियाँ तोड़,
सजाऊँ हरपल मकसदी राहें अपनी
अतीत के आयामों में थोड़ा फँसकर,
अब बढ़ते चढ़ते सूरज की फितरत,
खुद को बदलने का असफल दौर,
औ जीवन की अथक बेचैनियों का,
चोटिल बोझिल एहसास लिख दूँ
तुम कहो तो सपनों उड़ान लिख दूँ,
मैं जीवन का हर साज लिख दूँ|
हसरतों के गुच्छों से खुशियाँ तोड़,
सजाऊँ हरपल मकसदी राहें अपनी
अतीत के आयामों में थोड़ा फँसकर,
अब बढ़ते चढ़ते सूरज की फितरत,
खुद को बदलने का असफल दौर,
औ जीवन की अथक बेचैनियों का,
चोटिल बोझिल एहसास लिख दूँ
तुम कहो तो सपनों उड़ान लिख दूँ,
मैं जीवन का हर साज लिख दूँ|
सफर में अपने तो हम बढ़ते ही रहे
सबको ही लेकर साथ में चलते रहे
नादानियों का सफर नादान था मैं,
खुद को ही खोकर चलता रहा मैं,
लालिमा एहसासों की साख हो जाये
महक उठे हवायें महक उठे ये दिन
ख़ाब सा ये जीवन आबाद हो जाये,
कहो तो दुआओं का साज लिख दूँ,
सोचता हूँ कुछ अल्फाज लिख दूँ,
जीवन की सच्ची परवाज लिख दूँ|।
©अतुल कुमार यादव.
सबको ही लेकर साथ में चलते रहे
नादानियों का सफर नादान था मैं,
खुद को ही खोकर चलता रहा मैं,
लालिमा एहसासों की साख हो जाये
महक उठे हवायें महक उठे ये दिन
ख़ाब सा ये जीवन आबाद हो जाये,
कहो तो दुआओं का साज लिख दूँ,
सोचता हूँ कुछ अल्फाज लिख दूँ,
जीवन की सच्ची परवाज लिख दूँ|।
©अतुल कुमार यादव.
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