हमने कब है मॉगा ठेंगा,
जो तुमको बस प्यारा है।
डूब मरो तुम ठेंगा पीछे,
यही हमारा नारा है।
जो तुमको बस प्यारा है।
डूब मरो तुम ठेंगा पीछे,
यही हमारा नारा है।
मेरे हिस्से में ना दौलत,
ना ही मान तुम्हारा है,
है अक्षर अक्षर सींचा मैनें,
कहता लहूँ हमारा है।
ना ही मान तुम्हारा है,
है अक्षर अक्षर सींचा मैनें,
कहता लहूँ हमारा है।
भले मिले ना ठेंगा मुझको,
पर गीतों को गाना है,
कलम की बस आरजू इतनी,
जग को गीत सुनाना है।
पर गीतों को गाना है,
कलम की बस आरजू इतनी,
जग को गीत सुनाना है।
साथ नहीं जग नहीं रहेगा,
मेरे दिल ने माना है,
हमको अपने मंजिल तक तो,
खुद ही चलते जाना है।
मेरे दिल ने माना है,
हमको अपने मंजिल तक तो,
खुद ही चलते जाना है।
परत लाज की नहीं उधड़ती,
यहां ना कोई शर्माता है,
जो दिल आये जैसा चाहे,
बकबक करता जाता है।
यहां ना कोई शर्माता है,
जो दिल आये जैसा चाहे,
बकबक करता जाता है।
फूलो की राहों में काटें,
वही बिछाता जाता है,
अल्प ज्ञान जेहन जो रखता,
क्युँ इतराता जाता है।
वही बिछाता जाता है,
अल्प ज्ञान जेहन जो रखता,
क्युँ इतराता जाता है।
नहीं चाहिये ठेंगा मुझको,
ना ही इतना प्यारा है,
ना मैं वृहद ज्ञान का ज्ञाता,
ना ही सम्भव सारा है।
ना ही इतना प्यारा है,
ना मैं वृहद ज्ञान का ज्ञाता,
ना ही सम्भव सारा है।
पढ़ना हो तो मुझको पढ़ लो,
जो भी हाल हमारा है,
क्यों करते हो व्यर्थ समय को,
आता नहीं दुबारा है।।
जो भी हाल हमारा है,
क्यों करते हो व्यर्थ समय को,
आता नहीं दुबारा है।।
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