साथ तुम्हारे चलता हरदम देखो किसका साया है,
हमने गैरों को ही अक्सर साथ तुम्हारे पाया है।
हमने गैरों को ही अक्सर साथ तुम्हारे पाया है।
अपना बनकर काम न आता जो जाना पहचाना है,
अब उसको ही तुम कहती हो अपना साथ निभाया है।
अब उसको ही तुम कहती हो अपना साथ निभाया है।
कदम कदम पर छलिया बन के जो बस तुमको छलता है,
अक्सर उसका ही तो नाम तुम्हारे दिल से आया है।
अक्सर उसका ही तो नाम तुम्हारे दिल से आया है।
आज समय तो लगता है ज्यादा हर बात परखने में ,
उसमें इतना क्या है ऐसा जो बस तुमको भाया है।
उसमें इतना क्या है ऐसा जो बस तुमको भाया है।
रिक्तिम सी चलती राहों का अब हर रिश्ता रौशन है,
भावों की बहती इस गंगा में जो आज समाया है।।
©अतुल कुमार यादव.
भावों की बहती इस गंगा में जो आज समाया है।।
©अतुल कुमार यादव.
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