पैसों के रंजिश के चलते,
घर को अपने जला दिया।
चावल दाल नसीब हुयी बस,
सब कुछ अपना गवां दिया।
घर को अपने जला दिया।
चावल दाल नसीब हुयी बस,
सब कुछ अपना गवां दिया।
पैसा पैसा करने वालों,
काले की हो वजह तुम्हीं।
काले पैसे रख कर तुमने,
साधारण को मुवा दिया।
काले की हो वजह तुम्हीं।
काले पैसे रख कर तुमने,
साधारण को मुवा दिया।
गीतों में कैसे प्रीत लिखुँ,
जो अधरों पर अड़ी हुयी,
स्वर्णिम सी राहें थी पर,
तुमने काँटा बिछा दिया।
जो अधरों पर अड़ी हुयी,
स्वर्णिम सी राहें थी पर,
तुमने काँटा बिछा दिया।
द्वार टिकाये आँखों को अब,
पैसो का पथ बाप देखता
बेटा सूरज सा तप तपकर,
चंदा को भी भूला दिया।
पैसो का पथ बाप देखता
बेटा सूरज सा तप तपकर,
चंदा को भी भूला दिया।
तुमने कैसा खेला खेला,
हालत सबकी पता करो,
नाकामी का इक आईना,
तुमने हमको थमा दिया।
हालत सबकी पता करो,
नाकामी का इक आईना,
तुमने हमको थमा दिया।
करना ही था सबका करते,
अपनों का क्युँ भला किये,
काला धन सादा कर तुमने,
हम जैसो को फँसा दिया।
अपनों का क्युँ भला किये,
काला धन सादा कर तुमने,
हम जैसो को फँसा दिया।
साहस करता जो सच बोलूँ,
कुछ कुछ तो तुम सुना करो,
प्रमुदित दिपक मन का मेरे,
जो जलता था बुझा दिया।।
कुछ कुछ तो तुम सुना करो,
प्रमुदित दिपक मन का मेरे,
जो जलता था बुझा दिया।।
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