Sunday, 5 March 2017

किसी ने कहा की चाँद बनो

किसी ने कहा की चाँद बनो,
तो किसी ने कहा की सूरज,
किसी ने कहा की दीप बनो,
तो किसी ने कहा सितारे||
किसी ने कहा कि कनक बनो तुम,
तो किसी ने कहा की मणि,
किसी ने कहा की रजत बनो तुम,
तो किसी ने कहा की जूगूनू||
ना ख्वाहिश है मेरी चाँद की,
ना चाहत है सूरज बनने की,
ना ही लौ हूँ मैं दीपक की,
ना चमक है मुझमें तारों की||
ना आभा कनकों की बनना,
ना ही किरण मणियों की,
ना ही पूंज होना रजतों की,
ना ही टिमटिम जूगूनू की||
सबने अपनी बात रखी थी,
पूछ ना सके कभी मेरे दिल की,
सबने अपनी अपनी कह डाली,
सुन न सके रूदन मेरे दिल की||
दिल में इक अरदास है मेरे,
बस एक कोहिनूर बनने की,
अगर पड़ा रहूँ मैं कोने में भी,
तो हौसला हो चमक रखने की||
                   ©अतुल कुमार यादव.

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