Sunday, 5 March 2017

हे ईश्वर! हे अल्ला! हे दाता!

हे ईश्वर! हे अल्ला! हे दाता!
तुम ही हो मेरे भाग्य-विधाता।
कृपा तुम्हारी जब हम पर होती,
तब सारी दुनियाँ अपनी होती,
नहीं किसी से डर है होता,
नहीं किसी से भय है होता,
होती जब दया दृष्टि की छाया,
खुद को सदा निडर मैं पाता,
हे ईश्वर! हे अल्ला! हे दाता!
तुम ही हो मेरे भाग्य-विधाता!
जीवन है सुख दुख का गागर,
पर तुम हो करुणा का सागर,
सब जन को रास हो आते,
सबके मन को हो तुम भाते,
क्या करूँ तेरा व्याख्याना,
मेरे तो कुछ समझ ना आता।
हे ईश्वर! हे अल्ला! हे दाता!
तुम ही हो मेरे भाग्य-विधाता।
तुम दीनों के हो सुखदाता,
तुम हो उनके भाग्य-विधाता,
तुम्हीं तो हो सृष्टि निर्माता,
तुम हो आदि अन्त के ज्ञाता,
जो तुमको मन भीतर पाता,
वो ही सदा मोक्ष को जाता,
हे ईश्वर! हे अल्ला! हे दाता!
तुम ही हो मेरे भाग्य-विधाता।
दूर करो दुख दर्द हमारे,
हे खुशियों के अमृतदाता,
सब कुछ तो है दिया आपका,
क्या भेंट करूँ मैं रिश्ता नाता,
अपनी कृपा बनाये रखना,
हरदम तुमको ही मैं ध्याता,
हे ईश्वर! हे अल्ला! हे दाता!
तुम ही हो मेरे भाग्य-विधाता।
           ©अतुल कुमार यादव.

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