घर सूना सूना सा तुम बिन आकर अब गुलजार करो,
घर के कोने कोने में तुम पायल की झंकार करो।
ज्यादा नहीं अखरता मुझको अपने मन का सूनापन,
जितना आँखों को चुभता है अपने घर का सूनापन,
सूनेपन में आज बैठकर राह तुम्हारी देख रहा हूँ
करो अलंकृत घर को मेरे ऐसा ही कुछ सोच रहा हूँ,
मेरी आँखों का धुँधलापन बोलो अब क्या छट पाएगा,
उजली सी मुस्कान तुम्हारी बोलो तम क्या छट पाएगा,
घर सूना सूना सा तुम बिन आकर अब गुलजार करो,
घर के कोने कोने में तुम पायल की झंकार करो।
बचपन में सपने देखे थे मुश्किल सारी हल करने को,
नई चेतना नई उमंगे जीवन को मधुमय करने को,
वृद्ध पिता माता की खुशियाँ आँखों में सपने पलते हैं,
घर के कोने कोने में तुम पायल की झंकार करो।
ज्यादा नहीं अखरता मुझको अपने मन का सूनापन,
जितना आँखों को चुभता है अपने घर का सूनापन,
सूनेपन में आज बैठकर राह तुम्हारी देख रहा हूँ
करो अलंकृत घर को मेरे ऐसा ही कुछ सोच रहा हूँ,
मेरी आँखों का धुँधलापन बोलो अब क्या छट पाएगा,
उजली सी मुस्कान तुम्हारी बोलो तम क्या छट पाएगा,
घर सूना सूना सा तुम बिन आकर अब गुलजार करो,
घर के कोने कोने में तुम पायल की झंकार करो।
बचपन में सपने देखे थे मुश्किल सारी हल करने को,
नई चेतना नई उमंगे जीवन को मधुमय करने को,
वृद्ध पिता माता की खुशियाँ आँखों में सपने पलते हैं,
साकारित उनको करने की आशा में हम खुद जलते हैं,
सही गलत का निर्णय लेना मेरा कोई काम नहीं है,
नई उम्मीदें नई रौशनी सपनों का अंजाम नहीं है,
घर अपना भी मंदिर है दिल से जो स्वीकार करो,
घर सूना सूना सा तुम बिन आकर अब गुलजार करो।
घर सूना सूना सा तुम बिन आकर अब गुलजार करो,
घर के कोने कोने में तुम पायल की झंकार करो।।
©अतुल कुमार यादव
सही गलत का निर्णय लेना मेरा कोई काम नहीं है,
नई उम्मीदें नई रौशनी सपनों का अंजाम नहीं है,
घर अपना भी मंदिर है दिल से जो स्वीकार करो,
घर सूना सूना सा तुम बिन आकर अब गुलजार करो।
घर सूना सूना सा तुम बिन आकर अब गुलजार करो,
घर के कोने कोने में तुम पायल की झंकार करो।।
©अतुल कुमार यादव
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