Saturday, 10 June 2017

नेता

वादो से अपने मुकर गया,
नेता को भायी यह रीत।
होगा सब कुछ फाइल में ही,
नेता को भायी यह प्रीत।
कालीन भरी सड़के होगी,
सभी भरेंगे सरपट दौड़।
साथ साथ है विकाश सबका,
हुये नेता प्रणेता गौड़।
दुल्हन विकाश की गली गली,
चुप रहती बस सहती पीर।
अंधेरे के साये में ही,
कभी नहीं रख पाती धीर।
जगता रहता जीवन हर पल,
लेकर सपने कुछ मनुहार।
सोता है अब प्रखर आचरण,
मानो रोता है परिवार।
सबसे लड़ता भिड़ता अब तो,
गरीब सम्मुख नेता व्याल।
सत्कर्म ध्येय रहा नहीं अब,
सारे जलते है इक ज्वाल।
आओ मिलकर चले साथ अब,
संसद में हो दो-दो हाथ।
ना होगा बातों से कुछ अब,
मिलकर सारे छोड़ो साथ।
नहीं किया प्रतिरोध अभी तक,
जिससे होते हैं बर्बाद।
इतना सब कुछ होने पर भी
करते रहते जिन्दाबाद।
नेता बस आँखें दिखलाता,
सारे दुख देने के बाद।
भारत के पैसे के बल से,
मौज उड़ाता है आजाद।।
         ©अतुल कुमार यादव

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