Monday, 17 July 2017

सरस्वती वन्दना









नमस्तुभ्यम्   नमस्तुभ्यम्   नमस्तुभ्यम्   वागेश्वरी,
नमस्तुभ्यम्   नमस्तुभ्यम्   नमस्तुभ्यम्  माहेश्वरी।

शुक्लवर्णी   श्वेतवसना   जगरक्षिणी  जगव्यापिनी,
तुम हमारे दुख हरो माँ दुखनाशक दुखनिवारिणी।
सुमति  दो  सद्बुद्धि  दो  श्रद्धामयी सौम्यरूपिणी,
शक्ति  दो  विश्वास  की  तुम  ज्ञान देवी भुवनेश्वरी।
नमस्तुभ्यम्   नमस्तुभ्यम्   नमस्तुभ्यम्  माहेश्वरी।

सुमनोहर    शुकाधाना     सर्वसिद्धे    सर्वरूपिणी,
ज्ञान  के  वरदान दो  माँ  विद्यारूपी  ब्रह्मचारिणी।
चिरयोगिनी    सन्यासिनी   हे   जगत्   उद्धारिणी,
तम  ह्रदय   के  दूर   कर   दो   वाग्देवी  वागेश्वरी।
नमस्तुभ्यम्   नमस्तुभ्यम्   नमस्तुभ्यम्  माहेश्वरी।।
                                      ©अतुल कुमार यादव.

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