Saturday, 10 June 2017

दिल में प्रेम की भाषा बहती

दिल में प्रेम की भाषा बहती आँखों में अंगारे हैं,
चेहरे पे चेहरे ही रख कर दिन औ रात गुजारे हैं,

डरी डरी रहती ये काया डरी डरी ही दिखती है,
मानो कोई दौर थमा है नमी आँख की कहती है,
कहते कहते याद किया जो सोच रहा था रातों में,
कितना किसको दर्द दिया हूँ प्यार भरी बरसातों में,
मन में हर पल द्वन्द मचाते भावों के फब्बारे है,
ख्वाब़ सभी उगने लगते हैं लगता जैसे तारे हैं,
दिल में प्रेम की भाषा बहती आँखों में अंगारे हैं,
चेहरे रख के चेहरे पर दिन और रात गुजारे हैं।

जगत समर में व्यथा भँवर में कोई जीता कोई हारा,
मुश्किल से लड़ने को सम्मुख जानो ये जीवन है सारा,
अपने जीवन के हिसाब को देने एक दिन जायेंगे,
कंपित अधर नयन सजल हो मन की व्यथा सुनायेंगे,
मन की आँखों के सम्मुख जो फैले ये अधियारे हैं
जीवन के जंजाल बने है जीवन के अंगारे हैं,
चेहरे पे चेहरे ही रख कर दिन औ रात गुजारे हैं,
दिल में प्रेम की भाषा बहती आँखों में अंगारे है।। 
                                        ©अतुल कुमार यादव

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