ले हाथों में संगीनों को,
सीमा पर हैं खड़े जवान।
अपनों की खातिर ही ये तो,
दे देते हैं अपनी जान।
इनके ही कारण अब भारत,
दिखलायी देता आजाद।
भारत माँ की सेवा करना,
हरदम इनको रहता याद।
तत्पर सच्चे मन से रहते,
अल्हड़ सी लेकर के जान।
कहते दुश्मन से क्या डरना
सीमा पर हम अड़े जवान।
सरहद खुद से प्यारी लगती,
हमको सेवा का अनुबन्ध।
भारत पर मरने मिटने की,
हम खाते हैं अब सौगन्ध।
दुख का सूरज हिम्मत दे,
सुख का सूरज भरें उड़ान।
कोई वार न खाली जाये,
दे दो उनको यह वरदान।
मैं अदना सा कलमकार हूँ,
सैनिक भाषा से अंजान।
कलम उठाकर बन्दूकों का
कैसे कर दूँ अब मैं गान।
सतत् कर्म की कहूँ कहानी,
लेकर सैनिक के अधिकार।
दुश्मन पर जब करें चढ़ायी,।
कॉप रहें तब सब गद्दार।
विस्फोटों से गूँज रहा अब,
जै जै जय हे वीर जवान।
अजर अमर कहलाये भारत,
अपना प्यारा हिन्दुस्तान।
ले हाथों में संगीनों को,
सीमा पर हैं खड़े जवान।
तत्पर सच्चे मन से रहते,
अल्हड़ सी लेकर के जान।
मैं अदना सा कलमकार हूँ,
सैनिक भाषा से अंजान।
अजर अमर कहलाये भारत,
जै जै जय हे वीर जवान।।
©अतुल कुमार यादव
सीमा पर हैं खड़े जवान।
अपनों की खातिर ही ये तो,
दे देते हैं अपनी जान।
इनके ही कारण अब भारत,
दिखलायी देता आजाद।
भारत माँ की सेवा करना,
हरदम इनको रहता याद।
तत्पर सच्चे मन से रहते,
अल्हड़ सी लेकर के जान।
कहते दुश्मन से क्या डरना
सीमा पर हम अड़े जवान।
सरहद खुद से प्यारी लगती,
हमको सेवा का अनुबन्ध।
भारत पर मरने मिटने की,
हम खाते हैं अब सौगन्ध।
दुख का सूरज हिम्मत दे,
सुख का सूरज भरें उड़ान।
कोई वार न खाली जाये,
दे दो उनको यह वरदान।
मैं अदना सा कलमकार हूँ,
सैनिक भाषा से अंजान।
कलम उठाकर बन्दूकों का
कैसे कर दूँ अब मैं गान।
सतत् कर्म की कहूँ कहानी,
लेकर सैनिक के अधिकार।
दुश्मन पर जब करें चढ़ायी,।
कॉप रहें तब सब गद्दार।
विस्फोटों से गूँज रहा अब,
जै जै जय हे वीर जवान।
अजर अमर कहलाये भारत,
अपना प्यारा हिन्दुस्तान।
ले हाथों में संगीनों को,
सीमा पर हैं खड़े जवान।
तत्पर सच्चे मन से रहते,
अल्हड़ सी लेकर के जान।
मैं अदना सा कलमकार हूँ,
सैनिक भाषा से अंजान।
अजर अमर कहलाये भारत,
जै जै जय हे वीर जवान।।
©अतुल कुमार यादव
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