Saturday, 10 June 2017

जमाना है, मुकद्दर है

जमाना है, मुकद्दर है, मुहब्बत है परेशानी,
जवानी है, अकीदत है, इबादत है परेशानी।
गुजारिश है, इजाजत है, जरा तुम गौर से देखो।
मुसाफिर हैं, सफर में हैं, हकीकत है परेशानी।
सहारा है, इशारा है, नदी का बस किनारा है।
समन्दर को मिटाने की, शरारत है परेशानी।
दिवाना है, दिवानी है, बहाना है उसूलों का।
कहाँ जायें किधर जायें, बग़ावत है परेशानी।
बताना है, दिखाना है, छिपाना है जमाने से।
अदायें जान लेती पर, अदावत है परेशानी।
भलाई है, बुराई है, गलतफ़हमी इशारें हैं।
उठी आवाज दिल की तो, हिमाकत है परेशानी।
किसानी को भरोसा है, उसे सूरज उगाना है।
नया करके दिखाने पर, सियासत है परेशानी।।
                                        ©अतुल कुमार यादव

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