कविता शब्द बड़ा ही सुन्दर,
सुन्दर सुन्दर कवि के भाव।
शब्दों की सूरत दिखती है,
कवि के सपनों की है नाव।
लय की भाषा पढ़ लो मन से,
आभाषित मन की है जान।
मेरे मन मंदिर में बैठी।
मानो कविता हो भगवान।
दुख के बदले सुख उपजाती,
सुख का मानो है संसार।
सपनों का सौदा आँखों से,
कवि को करना है स्वीकार।
दुनिया की यह रीति बड़ी है,
मन में नहीं आस-विश्वास।
सम्मोहन के इस दलदल में,
जाना नहीं किसी के पास।
कविता कविता कहलाती है,
कविता कहती मन की बात।
मन की बातों से अब देखों,
दिखा गयी अपने जज्बात।
अनुभव सारे सच करती है,
मुझको होता है अहसास।
हर पल तुम महसूस करो अब,
दिख जायेगा जीवन खास।
जो बातें करनी मुश्किल है,
लगती उसकी है आधार,
आँसू पीड़ा मन में लेकर,
लुटा रहीं है खुद से प्यार।
कविता मन की भाव समन्दर,
लहरें उठती सौ सौ बार।
कवि के मन की इस हलचल में,
करुणा करती करुण पुकार।
आँखों में आँसू का मतलब,
देखों किसमें कितना प्यार।
होठों में खामोशी लेकर,
लिख दो अपना जीवन सार।
मेरी कविता मुझसे कहती,
अलग रखो अपनी पहचान।
करो साधना उसकी हर पल,
जिससे जीवन में मुस्कान।।
©अतुल कुमार यादव
सुन्दर सुन्दर कवि के भाव।
शब्दों की सूरत दिखती है,
कवि के सपनों की है नाव।
लय की भाषा पढ़ लो मन से,
आभाषित मन की है जान।
मेरे मन मंदिर में बैठी।
मानो कविता हो भगवान।
दुख के बदले सुख उपजाती,
सुख का मानो है संसार।
सपनों का सौदा आँखों से,
कवि को करना है स्वीकार।
दुनिया की यह रीति बड़ी है,
मन में नहीं आस-विश्वास।
सम्मोहन के इस दलदल में,
जाना नहीं किसी के पास।
कविता कविता कहलाती है,
कविता कहती मन की बात।
मन की बातों से अब देखों,
दिखा गयी अपने जज्बात।
अनुभव सारे सच करती है,
मुझको होता है अहसास।
हर पल तुम महसूस करो अब,
दिख जायेगा जीवन खास।
जो बातें करनी मुश्किल है,
लगती उसकी है आधार,
आँसू पीड़ा मन में लेकर,
लुटा रहीं है खुद से प्यार।
कविता मन की भाव समन्दर,
लहरें उठती सौ सौ बार।
कवि के मन की इस हलचल में,
करुणा करती करुण पुकार।
आँखों में आँसू का मतलब,
देखों किसमें कितना प्यार।
होठों में खामोशी लेकर,
लिख दो अपना जीवन सार।
मेरी कविता मुझसे कहती,
अलग रखो अपनी पहचान।
करो साधना उसकी हर पल,
जिससे जीवन में मुस्कान।।
©अतुल कुमार यादव
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