Tuesday, 11 April 2017

आँसू घुटन दर्द ख्वाब

आँसू घुटन दर्द ख्वाब सब याद हैं,
दौलत दुआ दृष्टि दया आबाद हैं।

शिद्दत शोर शान शहर की बात तो,
सपनों की सदाओं में बर्बाद हैं।

चाँद चेहरा चाहत वक्त के संग,
पर इशारे जुगनूओं के बाद हैं।

हाल-चाल हवाला हालात के, पर,
समन्दर सफीना समय आजाद हैं।

पर परिन्दे पिंजरे पैबन्द अब तक,
मजहब मतलब मतलब के औलाद हैं।

इश्क़ ईनाम ईनायत सब अफसाना
अफसोस अतुल जख्म-ए-दिल याद हैं।।
                               ©अतुल कुमार यादव.

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