Monday, 1 August 2016

दाग दामन का छिपाने को

दाग दामन का छिपाने को बहाना चाहिए,
भूलकर गम जिन्दगी का मुस्कुराना चाहिए|

बदनसीबी भी मिले तो कारवाँ हो जिन्दगी,
अजनबी का साथ सबको ही निभाना चाहिए|

ख्वाहिशों की डोर सारी चाहते दिन रात की,
प्यार को तब प्यार से ही आजमाना चाहिए|

बेसहारा हो गयी है खाब सी ये जिन्दगी,
खाब में भी एक दीपक अब जलाना चाहिए|

हमसफर की बात दिल में घाव करती आजकल,
देखकर ही दिल्लगी को दिल लगाना चाहिए|

आँसुओं की धार दिल में चोट करती इसकदर,
चोट पर तब प्यार से मरहम लगाना चाहिए|

मैं अकेला तो नहीं था कोशिशें सब आपकी,
झूठ निकले राज सारे सच बताना चाहिए|

क्या खुशी क्या गम "अतुल" है घर हमारा झोपड़ी,
घर सजाने के लिए अब चाँद लाना चाहिए||
                                ✍©अतुल कुमार यादव

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