Saturday, 14 January 2017

मकर संक्रान्ति

आसमान में उड़ते
रंग बिरंगे पतंग
और उनसे होती
अतिशय कलाबाजियाँ
दिल के पन्नें पर 
नये उत्साह के साथ
एक आनन्द की
लकीर खींचती है,
जिसको मिटाने का
ख़्वाब लिए
तिल गुड़ रूपी
व्यंजनों का
रसास्वादन
उसके आनन्द को
उसके अहसास को
कभी कम नहीं
कर पाता,
आज
वही अहसास
वही आनन्द
हम सबको
एक बन्धन में
बाँध देता है।
मौसमों के लिहाज से
सर्द लिबाश में लिपटे
प्रेम सौहार्द के
सबसे अलग त्यौहार
मकर संक्रान्ति की
आप सभी को
शुभकामना और
हार्दिक बधाई।
©अतुल कुमार यादव.

Wednesday, 4 January 2017

जिनसे बिछड़े हुए मुझको मुद्दत हुयी है,

जिनसे बिछड़े हुए मुझको मुद्दत हुयी है,
याद सीने से उनकी लगा लेने दे|
रो रो कर थक चुका हूँ मैं यादों में उनकी,
मेरी हाल पे उनको मुस्कुरा लेने दे|
अरे आँख में लाख सपने सजाये हुए था,
उनको खाबों पर पहरा लगा लेने दे|
मैनें अंधेरे में जलाया था जो उन्स दीपक,
वो दीपक भी उनको बुझा लेने दे|
हमेशा से अँगूली वो मुझपे उठाते रहे हैं,
इल्जामों को अब सिर उठा लेने दे|
उनकी सुनाना तो आदत सदा से रही है,
फिर आज भी उनको सुना लेने दे|
अरे ये अक्सर रूठ जाते हैं रूठने वाले,
इस बार भी तू उनको मना लेने दे|
हकीकत आज कल में पता चल जायेगी,
अभी आईना तू उनको दिखा लेने दे|
मैं अपनी मर्जी का मालिक सदा से रहा,
"पर" खुद का मुझको जला लेने दे|
आसमां ओढ़कर तो एक दिन सो जाऊँगा,
अभी नींद से कुछ को जगा लेने दे|
अरे सब कुछ मिला उस खुदा से है मुझको,
झूठी तारिफों में अब मुस्कुरा लेने दे|
जिनसे बिछड़े हुए मुझको मुद्दत हुयी है,
याद सीने से उनकी लगा लेने दे||
                    ✍©अतुल कुमार यादव

Sunday, 1 January 2017

नया साल आया

जिन्दगीं में आज फिर से वो मुकाम आया,
हमारी उम्मीदें जगाने नया साल आया|
आज फिर दिल की खुशियाँ दर्शाने को,
आज लोगों को उमंग में नाचने गाने को,
ले आया होली दशहरा फिर मनाने को,
ईद दिवाली है सबको मिलने-मिलाने को,
लोगों को एक बार फिर हँसने हँसाने को,
जिन्दगीं में आज फिर वही मुकाम आया,
हमारी खुशियाँ सजाने नया साल आया|
कुछ फिर नये नये पावन काज कराने को,
कुछ को बन्धन में बधने और बधाने को,
नये रिस्ते बनाने और पुराना निभाने को,
रिस्तों में पड़ी दरारों को फिर मिटाने को,
एकता का पाठ दुबारा से फिर पढ़ाने को,
जिन्दगीं में आज फिर से वो मुकाम आया,
सहज रिस्तों को बताने नया साल आया|
पुरानी गलतियों को फिर भुलने भुलाने को,
नये रास्तें हो खुद की मंजिल पहूँचाने को,
दुख में लड़ने व और हौसला उपजाने को,
सुख के पलों को एक बार फिर सजाने को,
सुख दुख में समानता के भाव दर्शाने को,
जिन्दगीं में आज फिर से वो मुकाम आया,
हमें फिर से गले लगाने नया साल आया|
कुछ नये लोगों से फिर मिलने मिलाने को,
कुछ नये साथियों के साथ समय बिताने को,
कुछ नये लोगों के तजुर्बे सिखने सिखाने को,
कुछ पल फिर से अपनों के साथ बिताने को,
नयी वस्तुओं की फिर से पहचान दिलाने को,
छोटों को प्यार व बड़ों को विनय दिखाने को,
जिन्दगीं में आज फिर से वो मुकाम आया,
फिर से धड़कन धड़काने नया साल आया|
गीत गजल फिर से सुनने और सुनाने को,
जीवन गान फिर से गाने व गुनगुनाने को,
जीवन के उतार चढ़ाव फिर दिखाने को,
गलतियों से सबक सिखने सिखाने को,
उजड़ा चमन एक बार फिर सजाने को,
जिन्दगीं में आज फिर से वो मुकाम आया,
उत्सव का उपहार लिये नया साल आया|
आशा निराशा को देखने और दिखाने को,
जीत हार की भाषा समझने समझाने को,
हास परिभाष की भाषा आभास कराने को,
दिन रात की नियमितता फिर दर्शाने को,
प्रेम करूणा स्नेह भाव आभास कराने को,
हौसलों का पंख एक बार फिर से लगाने को,
जिन्दगीं में आज फिर से वो मुकाम आया,
लिखने फिर नया इतिहास नया साल आया|
सूर्य का तेज औ तारों की चमक दिखाने को,
चाँद गगन औ अम्बर का विश्वास दिलाने को,
ग्रह गोचर की दशा एक बार फिर दिखाने को,
जिन्दा को जिन्दा अहसास फिर दिलाने को,
अधियारी रातों में दीपक ज्योति जलाने को,
"अतुल" की कागज कलम स्याह बन जाने को,
जिन्दगीं में आज फिर से वो मुकाम आया,
देखो नया साल नया साल नया साल आया|
                                ©अतुल कुमार यादव.