आज मेरा दिल कुछ हैरान सा है,
देख के लगता ये सामान सा है।
मैं तुम्हारी बातों में शामिल नहीं,
बात का बादल ये आसान सा है।
आप मुझमें है औ मै आप में हूँ,
सार जीवन का ये पहचान सा है।
ठोकरे खा खा के हारा नहीं हूँ,
लफ़्ज मेरा तो ये धनवान सा है।
एक दूजे से हिम्मत जीत जाती,
वक्त करता ये भी ऐलान सा है।
रंग तेरी चाहत का छू लिया है,
अतुल फिर भी तेरा नादान सा है॥
✍©अतुल कुमार यादव
देख के लगता ये सामान सा है।
मैं तुम्हारी बातों में शामिल नहीं,
बात का बादल ये आसान सा है।
आप मुझमें है औ मै आप में हूँ,
सार जीवन का ये पहचान सा है।
ठोकरे खा खा के हारा नहीं हूँ,
लफ़्ज मेरा तो ये धनवान सा है।
एक दूजे से हिम्मत जीत जाती,
वक्त करता ये भी ऐलान सा है।
रंग तेरी चाहत का छू लिया है,
अतुल फिर भी तेरा नादान सा है॥
✍©अतुल कुमार यादव
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