Sunday, 17 January 2016

कुछ शब्द हमारा मान रखेगे

कुछ शब्द हमारा मान रखेगे कुछ अक्षर अपमानित होगें,
इतना ज्ञात  हुआ  है  हमको  कल झूठे हम साबित होगें।

सच  के अन्दर  जाने  कितने  दर्दों  को  घटना  बढ़ना है,
जाने कितने हिम-शिखरों  पर  और हमें कितना चढ़ना है,
सच की राहें सच  तक  जाती  राहों  में  सच ही मढ़ना है,
भावों को खुद ही गढ़ना है  पीड़ा अपनी खुद ही पढ़ना है,
भावुक मन होकर कहता  है  कल तो हम्हीं पराजित होगें,
इतना ज्ञात  हुआ  है  हमको  कल  झूठे हम साबित होगें।

दर्द  भरी  है  मन  की  बातें  हास  भरी  मृदु - भाषा  है,
खोये  कुछ  अहसास  हमारे  कुछ  खोयी  अभिलाषा  है,
आँसू  कुछ  आँखों  में   खोये  कुछ  दर्दों  की  भाषा  है,
सुख  दुख  से  सामंजस  रखना  रिश्तों  की  परिभाषा है,
दर्दों  के  गर  प्रेमी  हैं  तो  पद-चिन्हों  से  चिन्हित  होगें,
इतना ज्ञात  हुआ  है  हमको  कल झूठे हम साबित होगें।

जीवन  की  राहों  में  अक्सर  मन  ही  व्याकुल  होता है,
झूठ  बोलने   वाला  अक्सर   अपनी   गरिमा  खोता  है,
जब  से  होश   सम्भाला  मैनें  जग  कंधे  सच  ढोता  है,
उगता   ढलता   सूरज   जैसे   अंधकार - मय  होता  है,
धूमिल किरणें साथ लिये  कल जग से हम निर्वासित होगें,
इतना ज्ञात  हुआ  है  हमको  कल झूठे हम साबित होगें।

सच  के  भाव  पकड़ कर चलना  क्या रक्खा है बातों में,
अपनी  निजता  से  क्या  खेलें  क्या  रक्खा  जज्बातों में,
सच  का  सूरज  साथ  हमारे  सच  का  चन्दा  रातों  में,
दो  दो  हाथ   करें   भाषा   से   झूठ   मरे  आघातों  में,
झूठों की  दुनिया  में आकर  सच  केवल आभासित होगें,
इतना ज्ञात  हुआ  है  हमको  कल झूठे हम साबित होगें।
                                             ©अतुल कुमार यादव

No comments:

Post a Comment