शुन्य पड़े हैं भाव हमारे क्या उपमा तुम दे पावोगी?
तुम हमको इतना बतला दो तुम गीतों में कब आवोगी?
जीवन में मधुमास न घोलों कविता में अहसास न घोलों,
अपनी सासें अपनी है तो अधरों में तुम प्यास न घोलों,
जीवन में कब कैसे आयी मन को मेरे कैसे भायी,
पता नहीं है कुछ भी मुझको पूर्ण करों मेरी सुनवायी,
सासों में तुमको भर लूँ मैं क्या इतना हक़ दे पावोगी?
तुम हमको इतना बतला दो तुम गीतों में कब आवोगी?
ये अक्षर अक्षर राह देखतें शब्द प्रतिक्षित हो बैठें हैं,
गीत ग़ज़ल औ छन्द हमारे क्या बतलाऊँ कैसे हैं,
ख़बर सुनी जब से आने की हम यादों में घूम रहें हैं,
कुछ यादें कुछ सपने लेकर निपट अकेले झूम रहें हैं,
सपनें हमसे पूछ रहें हैं क्या आँखों में घुल पावोगी?
तुम हमको इतना बतला दो तुम गीतों में कब आवोगी?
मन की मेरे निर्मल पावन नेह भावना विचरित होगी,
भाषायें सब मौन रहेंगी इच्छायें सब मुखरित होगी,
मेरे गीतों को पढ़कर जब दुनिया नाम पता पूछेगी,
गीत अधुरे कुछ लेकर जब केवल तुमको ही ढूढ़ेगी,
क्या उस हारी दुनिया को तुम अपना नाम बता पावोगी?
तुम हमको इतना बतला दो तुम गीतों में कब आवोगी?
ये गीत हमारा कल तुमसे सम्बन्धों में बध जायेगा,
ये शब्द शब्द ये अक्षर अक्षर ये सब तुझमें सध जायेगा,
कल मैं शायद नहीं रहूँगा पर तुम ज़िन्दा रह जावोगी,
मेरे गीतों में आकर तुम केवल खुद को ही पावोगी,
अपने अन्तर-मन को बोलों तब उत्तर क्या दे पावोगी?
तुम हमको इतना बतला दो तुम गीतों में कब आवोगी?
©अतुल कुमार यादव
तुम हमको इतना बतला दो तुम गीतों में कब आवोगी?
अपनी सासें अपनी है तो अधरों में तुम प्यास न घोलों,
जीवन में कब कैसे आयी मन को मेरे कैसे भायी,
पता नहीं है कुछ भी मुझको पूर्ण करों मेरी सुनवायी,
सासों में तुमको भर लूँ मैं क्या इतना हक़ दे पावोगी?
तुम हमको इतना बतला दो तुम गीतों में कब आवोगी?
गीत ग़ज़ल औ छन्द हमारे क्या बतलाऊँ कैसे हैं,
ख़बर सुनी जब से आने की हम यादों में घूम रहें हैं,
कुछ यादें कुछ सपने लेकर निपट अकेले झूम रहें हैं,
सपनें हमसे पूछ रहें हैं क्या आँखों में घुल पावोगी?
तुम हमको इतना बतला दो तुम गीतों में कब आवोगी?
भाषायें सब मौन रहेंगी इच्छायें सब मुखरित होगी,
मेरे गीतों को पढ़कर जब दुनिया नाम पता पूछेगी,
गीत अधुरे कुछ लेकर जब केवल तुमको ही ढूढ़ेगी,
क्या उस हारी दुनिया को तुम अपना नाम बता पावोगी?
तुम हमको इतना बतला दो तुम गीतों में कब आवोगी?
ये शब्द शब्द ये अक्षर अक्षर ये सब तुझमें सध जायेगा,
कल मैं शायद नहीं रहूँगा पर तुम ज़िन्दा रह जावोगी,
मेरे गीतों में आकर तुम केवल खुद को ही पावोगी,
अपने अन्तर-मन को बोलों तब उत्तर क्या दे पावोगी?
तुम हमको इतना बतला दो तुम गीतों में कब आवोगी?
©अतुल कुमार यादव