नया दरिया नया साहिल नया मंजर दिखाएगा,
हमारी राह का पत्थर हमें ऊंचा उठाएगा।
अगर जो प्यार है तो प्यार का एहसास होने दे,
तकाजा कुछ पलों का ज़िंदगी में खास होने दे,
दिखेगा इश्क़ का सदका नज़र के पास होने दे,
मिटेंगे फासले सारे ज़रा विश्वास होने दे,
यही विश्वास सपनों को हकीक़त कर दिखाएगा,
हमारी राह का पत्थर हमें ऊंचा उठाएगा।
नज़र भी बात करती है नज़र से बात होने दे,
ज़मीं पर आँख से मेरे कभी बरसात होने दे,
दिखेगा आँख में जुगनू ज़रा सी रात होने दे,
कहेगी सच निगाहे फिर सही हालात होने दे,
सही हालात का जुगनू कभी दुनिया सजाएगा,
हमारी राह का पत्थर हमें ऊंचा उठाएगा।
हुआ है जो नहीं अब तक उसे तू आज़ होने दे,
परिंदा हूं नया मैं तो नयी परवाज़ होने दे,
मुकद्दर राज़ है तो तू इसे बस राज़ होने दे,
मिलेगी हर नई मंजिल सही आगाज़ होने दे,
सही आगाज़ ही एक दिन बुलंदी पर बिठाएगा,
हमारी राह का पत्थर हमें ऊंचा उठाएगा।
अभी शुरुआत मेरी है मुझे नाकाम होने दे,
अकेला छोड़ दे मुझको मुझे बदनाम होने दे,
मुहब्बत है इनायत तो मुहब्बत आम होने दे,
लिखेंगे फिर ग़ज़ल तुम पर हँसी वो शाम होने दे,
हँसी उस शाम की गजलें जमाना साथ गाएगा,
हमारी राह का पत्थर हमें ऊंचा उठाएगा।
©अतुल कुमार यादव