Friday, 28 October 2016

मन की माटी ये दिल का तेल

मन की माटी ये दिल का तेल
हम आँखों के दीप जलाते है।।

चारों ओर शोर मचाती हैं,
तारों से रौशन काली रातें,
साथी मिलके दीया जलाते,
गले मिलते रंगोली सजाते,
मिटा मिटा के अंधकार द्वेष,
सभी को प्रेम से गले लगाते,
खुशियों के दरवाजे खोलकर,
हम स्नेही बारूद जलाते है।
हम आँखों के दीप जलाते है।।

आज भटके हैं जो विषयों से,
हम उनको ही याद दिलाते है,
अमावश के तम में खो खोकर,
अयोध्या राम को पुन: बुलाते है,
रात अलौकिक करने को आज,
पूर्णिमा सा ये दीप जलाते है,
बन कर प्रकाश पूंज-सा दीपक,
आज हर दिल में इतराते है।
हम आखों के दीप जलाते है।।

आँखों में ये आश की किरणें,
जगमग आशा ज्योति जलाती है,
सूरज बादल हिम्मत की हवा,
धड़कन की सब गीतें गाती है,
नजरों के झिलमिल में रौशनी,
मानों बरबस स्नेह लुटाती है,
कहते है सब जन दिवाली पर,
दीप जलाकर खुशिया लाते है,
हम आखों के दीप जलाते है।।
             ✍©अतुल कुमार यादव

Wednesday, 12 October 2016

मेरे कान्हा मेरो कान्हा

मेरे कान्हा मेरो कान्हा,
आओ तुमको गीत सुनाये|-२
अपने मन की सारी बातें,
आओ कान्हा तुम्हें सुनाये|
मेरे कान्हा मेरो कान्हा,
आओ तुमको गीत सुनाये|
तुम्हीं हो सूरज उगते छिपते,
तुम्हीं हो तारे टिमटिमाते,
तुम्हारे बल पर हम तो हरदम,
रहे गीत औ ग़ज़ल को गाते,
तुम हो यहां के प्रेम सरोवर,
तुम्हीं प्रेम की नदी बहाते,
तुम्हारी दी हुयी प्रेम-पूँजी,
हम तो कान्हा रहे लुटाते,
वही गीत औ ग़ज़ल हमारे,
पल पल हर पल तुम्हें बुलाये,
मेरे कान्हा मेरो कान्हा,
आओ तुमको गीत सुनाये,
अपने मन की सारी बातें,
आओ कान्हा तुम्हे बताये
मेरे कान्हा मेरो कान्हा,
आओ तुमको गीत सुनाये|
हम समय से आँख चुराये,
समय परिन्दा आँख दिखाये,
पर देखने वाले देख रहे हैं,
ह्रदय पटल पर तुम्हें बसाये,
अब तुम्हीं बता दो मेरो कान्हा,
तुमको तन मन बनाये कैसे,
मंदिर मस्जिद गुरूद्वारों से ,
कान्हा कब तक तुम्हें बुलाये,
आओ आदर्शों के शीशमहल में,
पत्थर वाली गीत सुनाये,
मेरे कान्हा मेरो कान्हा,
आओ तुमको गीत सुनाये,
अपने मन की सारी बातें,
आओ कान्हा तुम्हे बताये,
मेरे कान्हा मेरो कान्हा,
आओ तुमको गीत सुनाये|
देखो डोरी बँध रही है,
रीति रिवाजों के बन्धन की,
पर रीति रिवाजों के बन्धन में,
छोटी सी इक कसक बची है,
इस पागल दुनियादारी ने,
मतलब की बस प्रीत रची है,
अपनी प्रीत को फिर दुहराने,
बन्धन से अब मुझे छुड़ाने,
मेरे कान्हा तुम आ जाओ,
मेरो कान्हा तुम आ जाओ,
तुम्हें सदा अपनी गीतों में,
अतुल गाये और गुनगुनाये|
मेरे कान्हा मेरो कान्हा,
आओ तुमको गीत सुनाये,
अपने मन की सारी बातें,
आओ कान्हा तुम्हे बताये,
मेरे कान्हा मेरो कान्हा,
आओ तुमको गीत सुनाये|-२
            ✍©अतुल कुमार यादव